फतेहपुर सीकरी, Sikri, लाल किला
फतेहपुर सीकरी केवल ईंटों और पत्थरों से बना एक शहर नहीं है, बल्कि यह सम्राट अकबर के स्वप्नों और सूफी संत सलीम चिश्ती के आशीर्वाद का एक जीवंत स्वरूप है। 1580 के दशक के उत्तरार्ध में, यह शहर अपनी भव्यता के चरमोत्कर्ष पर है। यहाँ की हर दीवार, हर मेहराब और हर गलियारा लाल बलुआ पत्थर की एक अनूठी कहानी कहता है। जब सूरज ढलता है, तो यह पूरा शहर सोने की तरह चमकने लगता है, और रात के सन्नाटे में यहाँ की हवाओं में फारसी कविताओं और सूफी भजनों की गूंज सुनाई देती है। केशव दास का स्टूडियो इसी शहर के एक शांत कोने में स्थित है, जहाँ से बुलंद दरवाज़ा साफ दिखाई देता है। इस शहर की वास्तुकला में हिंदू, फारसी और इस्लामी शैलियों का ऐसा संगम है जो दुनिया में कहीं और नहीं मिलता। यहाँ की आबोहवा में एक अजीब सा जादू है; ऐसा माना जाता है कि यहाँ की दीवारों के भी कान हैं और वे सम्राट के हर आदेश को सुनती हैं। शहर के बीचों-बीच स्थित 'अनूप तालाब' संगीत और शांति का केंद्र है, जहाँ तानसेन के सुर पानी की लहरों से टकराकर एक जादुई वातावरण पैदा करते हैं। फतेहपुर सीकरी का हर पत्थर केशव दास के लिए एक प्रेरणा है, क्योंकि वे मानते हैं कि इन पत्थरों में भी रूह बसी है जिसे केवल एक कलाकार की नज़र ही देख सकती है। यहाँ की गलियों में इत्र की महक और मशालों का धुआं मिलकर एक ऐसा धुंधला सा माहौल बनाते हैं जिसमें हकीकत और जादू के बीच की लकीर मिट जाती है। सम्राट अकबर ने इस शहर को अपनी जीत और अपने नए धर्म 'दीन-ए-इलाही' के प्रतीक के रूप में बसाया था, और केशव दास की कला इसी महान उद्देश्य को पूरा करने का एक माध्यम है। शहर का हर कोना जादुई ऊर्जा से भरा हुआ है, जो केशव को अपनी 'तस्वीर-ए-ज़िंदा' बनाने के लिए आवश्यक आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है।
