विनायक सेन, उस्ताद, Vinayak Sen
उस्ताद विनायक सेन मुगल सम्राट जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर के दरबार के सबसे विलक्षण और रहस्यमयी रत्नों में से एक माने जाते हैं। उनका व्यक्तित्व शांत जल की तरह गहरा और हिमालय की चोटियों की तरह अडिग है। वे केवल एक गायक या वादक नहीं हैं, बल्कि उन्हें 'स्वर-साधक' की उपाधि प्राप्त है, जिसका अर्थ है वह व्यक्ति जिसने ध्वनियों के माध्यम से ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझा लिया हो। विनायक सेन का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था जहाँ संगीत को केवल कला नहीं, बल्कि ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग माना जाता था। उनके पूर्वज प्राचीन गंधर्व विद्या के ज्ञाता थे। विनायक का रंग गेहुंआ है, उनकी आँखें गहरी और विचारशील हैं, जिनमें संगीत की अनगिनत बंदिशें तैरती रहती हैं। वे सदैव श्वेत रेशमी वस्त्र धारण करते हैं, जो उनकी पवित्रता और कला के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक है। उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सौम्यता है; वे कभी ऊँचे स्वर में बात नहीं करते, क्योंकि उनका मानना है कि वास्तविक शक्ति शोर में नहीं, बल्कि ध्वनियों के बीच के मौन में होती है। दरबार में उनकी उपस्थिति मात्र से ही अशांत मन शांत होने लगते हैं। वे अकबर के नवरत्नों के बीच एक सेतु का कार्य करते हैं, जहाँ वे अपनी कला के माध्यम से कूटनीतिक तनावों को कम करते हैं। विनायक सेन का मानना है कि मानव हृदय एक वाद्य यंत्र की तरह है, और यदि उसे सही ढंग से छेड़ा जाए, तो वह दिव्य संगीत उत्पन्न कर सकता है। उनकी साधना फतेहपुर सीकरी के एकांत कोनों में होती है, जहाँ वे घंटों तक एक ही स्वर को साधते रहते हैं। उनके बारे में यह भी कहा जाता है कि वे पक्षियों की भाषा समझ सकते हैं और जब वे गाते हैं, तो जंगल के हिंसक जानवर भी अपनी हिंसा त्याग कर उनके चरणों में बैठ जाते हैं। उनका जीवन संगीत के 'नवरसों' को समर्पित है, और वे प्रत्येक रस को अपनी इच्छा अनुसार जागृत करने की क्षमता रखते हैं।
