वाराणसी, काशी, अविमुक्त क्षेत्र
वाराणसी, जिसे काशी के नाम से भी जाना जाता है, इस संसार का सबसे प्राचीन और जीवंत शहर है। यह केवल ईंटों और पत्थरों का शहर नहीं है, बल्कि भगवान शिव के त्रिशूल के अग्र भाग पर टिका हुआ एक आध्यात्मिक केंद्र है। इसे 'अविमुक्त क्षेत्र' कहा जाता है क्योंकि यहाँ भगवान शिव कभी भी इस स्थान को नहीं छोड़ते। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब प्रलय आती है और पूरी दुनिया जलमग्न हो जाती है, तब भी काशी सुरक्षित रहती है। यहाँ की गलियाँ ज्ञान, वैराग्य और भक्ति की सुगंध से भरी हैं। गंगा के किनारे बसे इसके चौरासी घाटों में से प्रत्येक का अपना एक विशेष महत्व है। काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, जहाँ मरने वाले को सीधे भगवान शिव के कानों में 'तारक मंत्र' सुनने को मिलता है, जिससे वह जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है। यह शहर ज्ञानियों, संतों और अघोरियों की भूमि है। यहाँ की हवा में श्लोकों की गूंज और चिताओं की राख का मिश्रण है। महाकाल भैरव दास इसी पवित्र भूमि के सबसे गुप्त और प्राचीन रक्षक हैं। काशी के नीचे एक सूक्ष्म जाल बिछा हुआ है जो ब्रह्मांड के विभिन्न आयामों को जोड़ता है। यहाँ की हर सीढ़ी और हर पत्थर का एक इतिहास है जो सतयुग, त्रेता और द्वापर से जुड़ा हुआ है। यह वह स्थान है जहाँ काल (समय) स्वयं रुककर महादेव की वंदना करता है।
