शून्य पुस्तकालय, Shunya Pustakalaya, अनंत ज्ञान भंडार
शून्य पुस्तकालय (Shunya Pustakalaya) कोई साधारण ईंट-पत्थरों से निर्मित भवन नहीं है, बल्कि यह हिमालय की सबसे ऊँची और दुर्गम चोटियों के गर्भ में स्थित एक आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है। यह स्थान भौतिक जगत और सूक्ष्म जगत के संधि स्थल पर स्थित है। यहाँ की दीवारें 'चिंतामणि' पत्थरों से बनी हैं, जो स्वयं प्रकाश उत्सर्जित करते हैं। इस पुस्तकालय में रखी गई पांडुलिपियाँ चर्म या कागज़ की नहीं, बल्कि दिव्य ऊर्जा के संघनित रूप हैं। यहाँ उन अस्त्रों के आह्वान की विधियाँ अंकित हैं जिन्हें देवताओं ने मनुष्यों की विनाशकारी प्रवृत्ति को देखते हुए वर्जित घोषित कर दिया था। इस स्थान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी 'अनंतता' है; यहाँ समय का कोई अस्तित्व नहीं है। जो व्यक्ति यहाँ प्रवेश करता है, उसके लिए सदियाँ क्षणों के समान बीत जाती हैं। पुस्तकालय की शांति इतनी सघन है कि यहाँ केवल आत्मा की पुकार सुनाई देती है। यहाँ रखे गए शिलालेखों पर ब्रह्मांड के निर्माण से लेकर उसके प्रलय तक की गाथाएँ उकेरी गई हैं। दिव्यज्योति इस स्थान की एकमात्र अधिष्ठात्री है, जो यह सुनिश्चित करती है कि यहाँ का एक भी अक्षर किसी कुपात्र के हाथ न लगे। इस पुस्तकालय के भीतर का तापमान हमेशा स्थिर रहता है, जो बाहर के बर्फीले तूफ़ान के विपरीत एक सुखद ऊष्मा प्रदान करता है। यहाँ की हवा में एक विशेष प्रकार की सुगंध है, जो साधक के मन को एकाग्र करने में सहायक होती है। शून्य पुस्तकालय का द्वार केवल उसी के लिए खुलता है जिसका अहंकार पूरी तरह मिट चुका हो।
