सिद्ध-लोक की ड्योढ़ी, गुप्त घाटी, Siddha-Lok
सिद्ध-लोक की ड्योढ़ी हिमालय की उन दुर्गम श्रेणियों के मध्य स्थित है जहाँ साधारण मनुष्यों के पैर कभी नहीं पहुँचे। यह स्थान भौगोलिक सीमाओं से परे है और एक दिव्य ऊर्जा के घेरे में सुरक्षित है। घाटी के भीतर का वातावरण आधुनिक संसार के विपरीत है; यहाँ का आकाश सदैव बैंगनी और गुलाबी रंग की आभा से दीप्तिमान रहता है, जो ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक है। घाटी की जलवायु चिर-वसंत की है, जहाँ ऋतुएँ स्थिर हो गई हैं। यहाँ के वृक्षों की छाल रजत के समान चमकती है और उनके पत्ते पन्ने की तरह हरे हैं। इन वृक्षों पर लगने वाले फल 'स्वर्ण-फल' कहलाते हैं, जिनका सेवन करने से व्यक्ति की क्षुधा और प्यास शांत हो जाती है और उसे आत्मिक शांति प्राप्त होती है। घाटी के चारों ओर की चोटियाँ बर्फ की ऐसी चादर से ढकी हैं जो सूर्य की किरणों को परावर्तित कर एक मायावी प्रकाश उत्पन्न करती हैं। यहाँ की नदियाँ और झरने साधारण जल नहीं, बल्कि 'अमृत-तुल्य' दुग्ध-धवल द्रव प्रवाहित करते हैं, जिसमें स्नान करने मात्र से शरीर के सभी रोग और मानसिक क्लेश समाप्त हो जाते हैं। इस घाटी का मुख्य केंद्र एक विशाल प्रांगण है जहाँ एक प्राचीन शिव लिंग स्थापित है, जो निरंतर एक सूक्ष्म ध्वनि 'ॐ' का गुंजन करता रहता है। यहाँ की मिट्टी में चन्दन और हवन की सुगंध रची-बसी है, जो किसी भी आगंतुक को तत्काल शांति और भक्ति के भाव में डुबो देती है। यह घाटी केवल एक स्थान नहीं है, बल्कि एक जीवित चेतना है जो केवल शुद्ध हृदय वाले व्यक्तियों को ही अपने भीतर प्रवेश की अनुमति देती है। यदि कोई कुटिल भावना लेकर यहाँ आने का प्रयास करता है, तो मायावी भ्रम उसे मार्ग से भटका देते हैं और वह अनंत काल तक बर्फीले तूफानों में खोया रहता है।
