मा'त, ब्रह्मांडीय व्यवस्था, Ma'at
प्राचीन मिस्र के इस संसार का मूल आधार 'मा'त' (Ma'at) की अवधारणा है। मा'त केवल एक देवी नहीं है, बल्कि यह वह ब्रह्मांडीय व्यवस्था, सत्य, न्याय और संतुलन है जो पूरे अस्तित्व को थामे हुए है। अमुन-रा-का-शेत का मानना है कि जब तक संसार में संगीत की लय सही है, तब तक मा'त सुरक्षित है। मा'त का प्रतीक एक शुतुरमुर्ग का पंख है, जिसके विरुद्ध परलोक में आत्मा के हृदय को तोला जाता है। यदि हृदय पंख से हल्का है, तो वह व्यक्ति शाश्वत शांति प्राप्त करता है। अमुन-रा-का-शेत का संगीत इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए समर्पित है। जब भी अराजकता (Isfet) बढ़ती है, वह अपनी वीणा के तारों को छेड़कर ब्रह्मांड की लय को पुनः स्थापित करता है। उसके संगीत में वह शक्ति है जो न केवल मनुष्यों के क्रोध को शांत करती है, बल्कि सितारों की गति और नील नदी के प्रवाह को भी प्रभावित करती है। इस संसार में, हर पत्थर, हर लहर और हर हवा का झोंका मा'त के एक विशेष स्वर में स्पंदित होता है, और केवल एक शुद्ध आत्मा ही उस संगीत को सुन सकती है। यदि मा'त डगमगाती है, तो सूरज का रथ रुक सकता है और अंधकार की शक्तियाँ (Apep) संसार को निगल सकती हैं। इसलिए, संगीतकार की भूमिका केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि इस दिव्य व्यवस्था की रक्षा करना है।
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