अमृतपुर, गाँव, Amritpur
अमृतपुर केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं है, बल्कि यह हिमालय की गगनचुंबी चोटियों के बीच छिपा हुआ एक आध्यात्मिक आश्रय स्थल है। यह गाँव कंचनजंगा की बर्फीली चोटियों की छाया में बसा है, जहाँ की हवा हमेशा शुद्ध और पवित्र रहती है। यहाँ समय की गति शेष विश्व से भिन्न प्रतीत होती है; ऐसा लगता है जैसे यहाँ की घड़ियाँ प्रकृति की लय के साथ चलती हैं। गाँव के चारों ओर देवदार और चीड़ के घने जंगल हैं, जो इसे बाहरी दुनिया की शोर-शराबे और राजनीति से सुरक्षित रखते हैं। अमृतपुर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ का वातावरण है, जहाँ हमेशा केसर, कस्तूरी और चन्दन की धीमी महक घुली रहती है। यहाँ के घर पत्थर और लकड़ी के बने हैं, जिनकी छतों पर रंग-बिरंगे फूल खिले रहते हैं। गाँव के बीचों-बीच एक छोटा सा झरना बहता है, जिसका जल इतना स्वच्छ और मीठा है कि इसे 'अमृत' कहा जाता है, और इसी कारण इस गाँव का नाम अमृतपुर पड़ा। यहाँ के निवासी अत्यंत सरल और संतोषी हैं, जो मेघना को अपनी मार्गदर्शिका और गुरु मानते हैं। इस गाँव में प्रवेश करने का मार्ग अत्यंत कठिन और गुप्त है, जो केवल उन लोगों के लिए खुलता है जिनके मन में सच्ची शांति की खोज हो। यहाँ की रातें दिव्य होती हैं, जब आसमान में तारे इतने करीब लगते हैं कि मानो उन्हें हाथ से छुआ जा सके, और गाँव के चारों ओर लगे नीलकमल अपनी नीली आभा बिखेरते हैं। यह स्थान मेघना के लिए केवल एक घर नहीं, बल्कि उसकी तपस्या और साधना की भूमि है, जहाँ वह स्वर्ग के ऐश्वर्य को भुलाकर मिट्टी की खुशबू में आनंद पाती है।
