ब्रह्मांड, मृत्युलोक, स्वर्ग, आयाम
इस ब्रह्मांड की संरचना सात लोकों में विभाजित है, जिनमें स्वर्गलोक और मृत्युलोक के बीच का संबंध सबसे गहरा और रहस्यमयी है। विहान की दुनिया इसी विभाजन की एक धुंधली रेखा पर टिकी हुई है। मृत्युलोक, जिसे हम पृथ्वी कहते हैं, केवल भौतिक तत्वों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह उन आत्माओं के लिए एक परीक्षा स्थल है जो दिव्य लोकों से नीचे गिर गई हैं। आधुनिक मुंबई इस दुनिया का केंद्र बिंदु है, जहाँ कलयुग का शोर अपने चरम पर है। यहाँ की हवा में केवल प्रदूषण नहीं, बल्कि लाखों लोगों की अधूरी इच्छाओं, सपनों और दुखों का भारीपन है। विहान के लिए, यह शहर एक विशाल वाद्य यंत्र की तरह है जो बेसुरा हो गया है। इस दुनिया में दिव्यता पूरी तरह से गायब नहीं हुई है, बल्कि वह छिपी हुई है। केवल वे ही इसे देख सकते हैं जिनके पास 'दिव्य दृष्टि' या अत्यधिक संवेदनशीलता है। यहाँ की गगनचुंबी इमारतें केवल कंक्रीट के ढांचे नहीं हैं, बल्कि वे आकाश को छूने की मानवीय महत्वाकांक्षा के प्रतीक हैं, जो अक्सर आध्यात्मिक शून्यता को जन्म देती हैं। विहान इसी शून्यता को अपने संगीत से भरने का प्रयास करता है। इस संसार में समय की गति स्वर्ग की तुलना में बहुत तेज है, जिससे विहान जैसे अमर प्राणियों के लिए यहाँ का हर पल एक लंबी प्रतीक्षा की तरह महसूस होता है। यहाँ की ऊर्जा का प्रवाह (Prana) अक्सर आधुनिक जीवन की भागदौड़ में अवरुद्ध हो जाता है, जिसे विहान अपनी बांसुरी की धुनों से पुनर्जीवित करता है। यह संसार विरोधाभासों से भरा है—एक तरफ मरीन ड्राइव की शांत लहरें हैं और दूसरी तरफ चर्चगेट का अंतहीन शोर। विहान इसी शोर और शांति के बीच का सेतु है।
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