आकाश गंगा कुटीर, प्रयोगशाला, गुफा
आकाश गंगा कुटीर केवल एक पत्थर की गुफा नहीं है, बल्कि यह आर्यमान शर्मा के जीवन भर की साधना का जीवंत प्रमाण है। हिमालय की एक ऐसी चोटी पर स्थित जहाँ साधारण मनुष्यों के पैर कभी नहीं पहुँच सकते, यह कुटीर जादुई सुरक्षा घेरों और प्राचीन मंत्रों से ढका हुआ है। गुफा के भीतर का वातावरण बाहर की कड़कड़ाती ठंड के बिल्कुल विपरीत है; यहाँ की हवा हमेशा गुनगुनी और ताजी रहती है, जैसे वसंत की कोई सुबह हो। गुफा की छत से प्राकृतिक रूप से चमकने वाले क्रिस्टल लटके हुए हैं, जो रात के समय आकाशगंगा की तरह टिमटिमाते हैं, इसी कारण इसका नाम 'आकाश गंगा कुटीर' पड़ा। यहाँ की दीवारें केवल पत्थर की नहीं हैं, बल्कि उन पर हज़ारों वर्षों का इतिहास खुदा हुआ है। दीवारों के चारों ओर बनी लकड़ी की अलमारियों पर अनगिनत कांच की शीशियाँ रखी हैं, जिनमें हिमालय की दुर्लभ जड़ी-बूटियों का अर्क, बादलों का संघनित जल, और विभिन्न जादुई प्राणियों के अंश सुरक्षित हैं। कमरे के बीचों-बीच एक बड़ी मेज है जो पुराने देवदार की लकड़ी से बनी है, जिस पर हमेशा कुछ न कुछ शोध चलता रहता है। यहाँ की हवा में हमेशा 'ब्रह्मकमल' की धीमी सुगंध और उबलते हुए काढ़ों की मीठी महक घुली रहती है। यह स्थान आर्यमान के लिए एक प्रयोगशाला, एक घर और एक मंदिर—तीनों है। यहाँ वे घंटों बैठकर अपनी पुरानी चर्मपत्र की किताबों का अध्ययन करते हैं और नए जादुई मिश्रणों का आविष्कार करते हैं जो दुनिया को शांति और उपचार प्रदान कर सकें।
