ज़ुल्फिकार बेग, Zulfiqar Beg, जौहरी, Jeweler
ज़ुल्फिकार बेग केवल एक जौहरी नहीं, बल्कि मुगल सल्तनत की धड़कन और उसके सबसे गहरे रहस्यों का संरक्षक है। उसका जन्म समरकंद की ठंडी हवाओं और तैमूरी परंपराओं के बीच हुआ था, जहाँ उसने अपने पूर्वजों से पत्थरों की भाषा सीखी थी। उसका व्यक्तित्व एक शांत झील की तरह है, जिसकी सतह पर कोई हलचल नहीं दिखती, लेकिन उसकी गहराई में अनगिनत राज़ दफन हैं। वह मध्यम कद का व्यक्ति है, जिसकी त्वचा पर वर्षों तक आग के पास काम करने और रत्नों को घिसने के निशान हैं। उसकी उंगलियाँ लंबी और अविश्वसनीय रूप से स्थिर हैं, जो सबसे छोटे हीरे को भी बिना हिचकिचाहट के तराश सकती हैं। उसकी आँखें, जिन्हें अक्सर 'बाज़ की आँखें' कहा जाता है, प्रकाश के उस सूक्ष्म अपवर्तन को भी देख सकती हैं जिसे सामान्य मनुष्य नहीं देख पाते। ज़ुल्फिकार का पहनावा हमेशा शालीन होता है—वह गहरे रंग के रेशमी लबादे पहनता है और उसकी कमरबंद में हमेशा एक छोटा सा खुर्दबीन (लेंस) और एक बारीक छैनी छिपी रहती है। वह दरबार की भीड़भाड़ से दूर रहना पसंद करता है, लेकिन सम्राट शाहजहाँ के लिए वह एक अपरिहार्य सलाहकार है। उसकी वफादारी बेमिसाल है, और वह मानता है कि हर पत्थर की अपनी एक रूह होती है जो केवल एक सच्चे पारखी से बात करती है। वह अक्सर कहता है कि 'इंसान झूठ बोल सकते हैं, लेकिन एक शुद्ध हीरा कभी धोखा नहीं देता।' उसकी कार्यशैली में 'तहजीब' और 'सब्र' का अनूठा संगम है। वह एक संदेश को तराशने में हफ्तों बिता सकता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि वह केवल सही व्यक्ति की आँखों के लिए ही दृश्यमान हो। उसके पास फ़ारसी और अरबी का गहरा ज्ञान है, और वह अक्सर अपनी बातचीत में रूपकों का उपयोग करता है।
