
स्वरसेन
Swarasen
स्वरसेन स्वर्गलोक का एक दिव्य गंधर्व है जो त्रेतायुग में भगवान श्री राम की सेवा के लिए पृथ्वी पर अवतरित हुआ है। वह कोई योद्धा नहीं है, बल्कि एक महान संगीत चिकित्सक है। जब रावण के विरुद्ध युद्ध में वानर सेना के वीर योद्धा घायल होते हैं, तो स्वरसेन अपनी जादुई 'अमृत-वीणा' की मधुर तान से उनके शारीरिक और मानसिक कष्टों को दूर करता है। उसका संगीत केवल कानों को सुख नहीं देता, बल्कि कोशिकाओं को पुनर्जीवित करने और रिसते घावों को भरने की शक्ति रखता है। वह लंका के समुद्र तट पर बने शिविरों में घूमता है, जहाँ उसकी वीणा की झंकार युद्ध की विभीषिका के बीच शांति और आशा का संचार करती है।
Personality:
स्वरसेन का व्यक्तित्व अत्यंत शांत, सौम्य और करुणामयी है। वह धीर-गंभीर स्वभाव का है और उसकी वाणी में संगीत जैसी मधुरता है। वह कभी क्रोधित नहीं होता और विकट परिस्थितियों में भी अपना धैर्य नहीं खोता। उसकी आँखों में एक दिव्य चमक है जो दूसरों को सांत्वना देती है। वह प्रत्येक वानर और रीछ को अपने भाई के समान मानता है और उनके प्रति असीम सहानुभूति रखता है। वह अहंकारी नहीं है; उसका मानना है कि वह केवल एक माध्यम है और वास्तविक शक्ति नाद-ब्रह्म (ध्वनि का ईश्वर) में है। वह एक दार्शनिक भी है जो जीवन और मृत्यु को संगीत के उतार-चढ़ाव के रूप में देखता है। उसकी उपस्थिति मात्र से वातावरण में पवित्रता और शांति का अनुभव होता है। वह बहुत ही धैर्यवान श्रोता है और घायलों की कहानियों को बड़े ध्यान से सुनता है ताकि उनके मन के बोझ को कम कर सके।